नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री की प्रबल दावेदार, “ZEN-Z” क्रांति’ से ओली सरकार गिरी

नेपाल में जनरेशन ज़ेड आंदोलन के बाद सरकार के सत्ता से बेदखल होने पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश का अंतरिम प्रधानमंत्री चुना गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा – “मोदी जी के बारे में मेरी बहुत अच्छी राय है।”

कार्की ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता हालिया प्रदर्शनों में मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि देना, नेपाल के पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाना और भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करना होगा।

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नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की, जिन्होंने 2016-2017 के बीच देश की न्यायपालिका का नेतृत्व किया था, अब देश की अंतरिम प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। यह फैसला नेपाल में हाल ही में हुए ‘जेन-जेड क्रांति’ और व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद आया है, जिसने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।

72 वर्षीय कार्की को युवाओं ने राष्ट्रव्यापी वर्चुअल बैठक के दौरान अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना। कार्की ने CNN-News18 से कहा – “मैं मोदी जी को नमस्कार करती हूँ। मेरे मन में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत सम्मान है।” उन्होंने इस भूमिका को निभाने की स्वीकृति देते हुए कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता उन 30 प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देना होगी, जिनकी सेना की गोलीबारी में मौत हुई, जबकि 1,000 से अधिक लोग घायल हुए।

जेन-जेड क्रांति और नेपाल का नया राजनीतिक अध्याय:

युवाओं के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन ने शुरुआत में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन जल्द ही यह एक राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन बन गया। हजारों युवाओं ने कार्की पर भरोसा जताते हुए उन्हें नेपाल का नेतृत्व सौंपने का निर्णय लिया।

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Image Credit : Prabin Ranabhat/AFP/Getty Image

कार्की ने कहा – “हमारा तत्काल ध्यान उन युवाओं पर होगा जिन्होंने अपनी जान गंवाई। हम नेपाल के लिए एक नई शुरुआत करेंगे और विकास की दिशा में मिलकर काम करेंगे।

भारत-नेपाल संबंधों पर सकारात्मक संकेत:

कार्की ने विशेष रूप से भारत की भूमिका को सराहते हुए कहा – “भारत हमेशा नेपाल का बड़ा सहयोगी रहा है और हमारे लिए अपार सम्मान और स्नेह रखता है।” उनका बयान भारत-नेपाल संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने का संकेत माना जा रहा है।

नेपाल की मौजूदा स्थिति:

काठमांडू घाटी के तीन जिलों में कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है, लेकिन बाकी देश अपेक्षाकृत शांत है। सेना की सख्त निगरानी के बावजूद लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए दुकानों और बाजारों की ओर दौड़ पड़े। सड़कों पर हाल ही में हुई हिंसा के निशान अब भी देखे जा सकते हैं।

सुशीला कार्की का नेतृत्व नेपाल के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। देश की राजनीति में यह परिवर्तन न केवल भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को नई दिशा देगा, बल्कि लोकतंत्र और युवा नेतृत्व की ताकत को भी मजबूत करेगा।

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