महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण विवाद: कुनबी जाति प्रमाणपत्र और हैदराबाद राजपत्र पर ओबीसी-बंजारा संगठनों का विरोध तेज

मराठा आरक्षण पर नया विवाद:

deccanherald 2024 09 25 zea1hkxi PTI11 17 2023 000322B scaled
Image Credit : PTI File Photo

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे ने 29 अगस्त को मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दबाव में, महाराष्ट्र सरकार ने 2 सितंबर को एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी कर कहा कि जिन मराठाओं के पुराने दस्तावेजों में कुनबी दर्ज है, उन्हें कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसके बाद से ही इसका विरोध शुरू हो गया है।

विरोध तेज़:

महाराष्ट्र में अब मराठा आरक्षण का विरोध और तेज हो गया है। मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र और आरक्षण देने के खिलाफ जालना जिले में ओबीसी, बंजारा और आदिवासी संगठनों ने आंदोलन की तैयारी की है। संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार यह जीआर वापस नहीं लेती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

कहा जा रहा है कि मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र और कोटा देने के लिए हैदराबाद राजपत्र का आधार लिया जा रहा है। लेकिन ओबीसी संगठनों का मानना है कि इससे अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्गों के अधिकार प्रभावित होंगे। कुनबी एक कृषि प्रधान समुदाय है, जो पहले से ही महाराष्ट्र में ओबीसी वर्ग में शामिल है।

बंजारा समाज की प्रतिक्रिया:

बंजारा संगठन गोर सेना के अध्यक्ष संदेश चव्हाण ने कहा कि हमें पहले अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया था और हैदराबाद राज्य में आरक्षण भी प्राप्त था। हम चाहते हैं कि हमारे अधिकार बहाल हों।

हाल ही में धाराशिव के 32 वर्षीय बंजारा युवक ने ST आरक्षण की मांग करते हुए आत्महत्या कर ली। 11 सितंबर से बंजारा युवा जालना कलेक्टर कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं, वरिष्ठ नेता हरिभाऊ राठौड़ ने 15 सितंबर को जालना और बीड में मार्च निकालने की घोषणा की है।

आदिवासी और ओबीसी संगठनों का विरोध:

आदिवासी संगठनों ने बंजारा समाज की ST आरक्षण की मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि बंजारा पहले से ही विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति (VJNT) वर्ग के तहत 3% कोटे का लाभ उठा रहे हैं।

ओबीसी कार्यकर्ताओं नवनाथ वाघमारे और सतसुंग मुंधे ने चेतावनी दी कि अगर मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र दिया गया तो OBC वर्ग में पहले से सूचीबद्ध 374 जातियों के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे। इसी के चलते ओबीसी नेताओं ने 10 अक्टूबर को नागपुर में एक विशाल मोर्चा निकालने का ऐलान किया है।

मराठा संगठनों में असंतोष:

मराठा क्रांति मोर्चा के राज्य समन्वयक संजय लाखे पाटिल ने भी मनोज जरांगे के खिलाफ बयान दिया। उनका कहना है कि हैदराबाद राजपत्र की पूरी जानकारी सामने नहीं रखी जा रही और केवल उन्हीं मराठाओं को फायदा मिलेगा जिनके दस्तावेजों में कुनबी लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मराठों को धोखा दे रही है।

हैदराबाद राजपत्र क्या है?

मराठवाड़ा क्षेत्र कभी हैदराबाद निजाम के अधीन था। निजाम प्रशासन ने जातियों और पेशों का रिकॉर्ड राजपत्र में दर्ज किया था। 1918 में मराठाओं को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण भी दिया गया था। आज उसी आधार पर मराठा समुदाय कुनबी/OBC दर्जे की मांग कर रहा है। निजाम के शासन के दौरान 17 जिले थे, जिनमें से औरंगाबाद, बीड, नांदेड़, परभणी और उस्मानाबाद बाद में महाराष्ट्र में शामिल हुए।

वर्तमान स्थिति:

मनोज जरांगे का आंदोलन अभी भी जारी है। उनका दबाव है कि पूरे मराठा समाज को OBC का लाभ मिले। वहीं, ओबीसी, आदिवासी और बंजारा समाज का कहना है कि इससे उनका आरक्षण हिस्सा घट जाएगा। इस मुद्दे ने महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में गहरी खाई पैदा कर दी है।

Leave a Comment