अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताए गए 165 दिनों के दौरान NASA, जापान की स्पेस एजेंसी JAXA और रूस की Roscosmos के अंतरिक्ष यात्रियों ने ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग किए, जो भविष्य की चिकित्सा, उन्नत तकनीक और स्पेस इकॉनमी को पूरी तरह बदल सकते हैं। माइक्रोग्रैविटी में किए गए ये रिसर्च न केवल पृथ्वी पर मानव जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होंगे, बल्कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में एक सस्टेनेबल अंतरिक्ष भविष्य की नींव भी रख रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर क्रू-11 मिशन के तहत NASA, JAXA और Roscosmos के अंतरिक्ष यात्रियों ने 165 दिनों से अधिक समय तक रहकर विज्ञान के कई अहम क्षेत्रों में ऐतिहासिक योगदान दिया।
NASA के अनुभवी एस्ट्रोनॉट माइक फिंके और ज़ेना कार्डमैन, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के किमिया यूई, और रूस की स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस के ओलेग प्लाटोनोव ने सैकड़ों वैज्ञानिक प्रयोगों और रिसर्च इन्वेस्टिगेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इन प्रयोगों में बायोलॉजी, फिजिकल साइंस, इन-स्पेस मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और स्टूडेंट-लेड एक्सपेरिमेंट्स शामिल रहे। इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट्स ISS National Laboratory® द्वारा स्पॉन्सर्ड थे, जिसका उद्देश्य मानवता के लिए लाभकारी खोजों को आगे बढ़ाना, भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करना और Low Earth Orbit (LEO) में एक सस्टेनेबल स्पेस इकॉनमी को मजबूत करना है।
वेक फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट फॉर रीजेनरेटिव मेडिसिन ने माइक्रोग्रैविटी में ब्लड वेसल्स युक्त इंजीनियर्ड लिवर टिश्यू का अध्ययन किया। यह प्रोजेक्ट NASA के Vascular Tissue Challenge से प्रेरित है और भविष्य में पृथ्वी तथा अंतरिक्ष दोनों में ऑर्गन रिप्लेसमेंट टेक्नोलॉजी को नई दिशा दे सकता है।
वहीं Cedars-Sinai Medical Center ने यह जांच की कि क्या Induced Pluripotent Stem Cells (iPSC) अंतरिक्ष में तेज़ी से विभाजित होते हैं। इस रिसर्च से हृदय रोग, न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों और अन्य जटिल रोगों के लिए स्टेम-सेल आधारित इलाज को नई गति मिल सकती है।
टेक्नोलॉजी क्षेत्र में, Axiom Space के सहयोग से Red Hat ने ISS पर अपने Device Edge Platform के माध्यम से एज कंप्यूटिंग को सफलतापूर्वक वैलिडेट किया। ऑर्बिट में रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग भविष्य के स्पेस रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
स्पेस सेफ्टी के क्षेत्र में, TransAstra Corporation ने Voyager Technologies के Bishop Airlock का उपयोग करते हुए एक Inflatable Capture Bag System का परीक्षण किया। यह सिस्टम अंतरिक्ष मलबे को इकट्ठा करने का एक किफायती और प्रभावी समाधान माना जा रहा है, जो बढ़ती LEO इकॉनमी में ऑर्बिट को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
इसके अलावा, National Science Foundation (NSF) द्वारा फंडेड Arizona State University के एक प्रोजेक्ट में यह अध्ययन किया गया कि Germicidal Ultraviolet Light स्पेस-आधारित जल प्रणालियों में बायोफिल्म निर्माण को कैसे प्रभावित करती है। इसके नतीजे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और पृथ्वी पर जल प्रणालियों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।
युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से कई Student-Led Experiments भी किए गए। इनमें Genes in Space™ जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिसमें 7वीं से 12वीं कक्षा के छात्र अंतरिक्ष में जेनेटिक्स रिसर्च के प्रस्ताव देते हैं। इस वर्ष के प्रोजेक्ट में Bacteriophages को संभावित थेराप्यूटिक एजेंट के रूप में जांचा गया।
इसके साथ ही Higher Orbits Go For Launch! कार्यक्रम के तहत छात्रों ने स्पेस में शैवाल, हरी बीन्स, रेशम के कीड़े और स्लाइम मोल्ड पर प्रयोग किए।
यह मिशन न केवल विज्ञान और तकनीक की सीमाओं को आगे बढ़ाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के नए द्वार भी खोलता है।अधिक जानकारी के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की official website पर विजिट किजिए।https://issnationallab.org/launches