क्या धातु का एक छोटा सा टुकड़ा क्वांटम अवस्था में होकर एक साथ कई जगह मौजूद हो सकता है? इस सवाल का जवाब अब ज़ोरदार “हाँ” में मिला है। University of Vienna और University of Duisburg-Essen के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए प्रयोग में यह साबित हुआ है कि हज़ारों परमाणुओं से बने धातु के नैनोपार्टिकल्स भी क्वांटम मैकेनिक्स के नियमों के अनुसार व्यवहार करते हैं। यह रिसर्च क्वांटम फिज़िक्स को मैक्रोस्कोपिक स्तर पर समझने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम मानी जा रही है।
क्या धातु का एक छोटा टुकड़ा क्वांटम अवस्था में दूर-दूर तक फैला हो सकता है?

इस सवाल का जवाब University of Vienna की एक रिसर्च टीम ने ज़ोरदार “हाँ” में दिया है। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Nature में प्रकाशित इस अध्ययन में University of Vienna और University of Duisburg-Essen के फिज़िसिस्ट्स ने यह दिखाया है कि हज़ारों सोडियम परमाणुओं से बने बड़े धात्विक नैनोपार्टिकल्स भी क्वांटम मैकेनिक्स के नियमों का पालन करते हैं।
यह प्रयोग अब तक के सबसे प्रभावशाली परीक्षणों में से एक माना जा रहा है, जिसमें क्वांटम मैकेनिक्स को लगभग मैक्रोस्कोपिक पैमाने पर जांचा गया है।Research information system
पदार्थ भी तरंग की तरह व्यवहार करता है
क्वांटम मैकेनिक्स के अनुसार, केवल प्रकाश ही नहीं बल्कि पदार्थ भी एक साथ कण और तरंग दोनों की तरह व्यवहार कर सकता है। यह सिद्धांत इलेक्ट्रॉनों, परमाणुओं और छोटे अणुओं के साथ कई बार डबल-स्लिट इंटरफेरेंस प्रयोगों में साबित हो चुका है।
लेकिन रोज़मर्रा की दुनिया में हम ऐसा व्यवहार नहीं देखते—क्योंकि बड़े आकार की वस्तुएँ क्लासिकल फिज़िक्स के नियमों के अनुसार चलती हैं।
बड़े धात्विक नैनोपार्टिकल्स में भी क्वांटम इंटरफेरेंस
University of Vienna में प्रोफेसर मार्कस अर्ंड्ट और स्टीफ़न गेर्लिच के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में पहली बार यह दिखाया गया कि धातु के बड़े नैनोपार्टिकल्स भी अपनी तरंग प्रकृति बनाए रखते हैं।
इन नैनोपार्टिकल्स का व्यास लगभग 8 नैनोमीटर है, जो आधुनिक ट्रांजिस्टर के आकार के बराबर है। इनका द्रव्यमान 170,000 से अधिक एटॉमिक मास यूनिट है, जो कई प्रोटीन से भी अधिक है। इसके बावजूद इन कणों में स्पष्ट क्वांटम इंटरफेरेंस देखा गया।
“Schrödinger का धातु का टुकड़ा”
स्टडी के प्रमुख लेखक और डॉक्टरेट छात्र सेबेस्टियन पेडलिनो के अनुसार,
“आम तौर पर यह उम्मीद की जाती है कि इतना बड़ा धातु कण क्लासिकल तरीके से व्यवहार करेगा। लेकिन इसका इंटरफेयर करना यह साबित करता है कि क्वांटम मैकेनिक्स इस पैमाने पर भी पूरी तरह लागू है।”
इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने 5,000 से 10,000 परमाणुओं से बने ठंडे सोडियम क्लस्टर्स को अल्ट्रावायलेट लेज़र से बनी तीन डिफ्रैक्शन ग्रेटिंग से गुजारा। इसके परिणामस्वरूप ऐसे इंटरफेरेंस पैटर्न बने जो क्वांटम थ्योरी से पूरी तरह मेल खाते हैं।
यह स्थिति श्रोडिंगर की प्रसिद्ध “कैट स्टेट” अवधारणा जैसी है—जहाँ एक ही समय में कोई वस्तु यहाँ भी होती है और यहाँ नहीं भी।
क्वांटम मैक्रोस्कोपिसिटी में नया रिकॉर्ड
इस अध्ययन के सह-लेखक क्लाउस हॉर्नबर्गर (University of Duisburg-Essen) ने पिछले वर्षों में नियर-फील्ड इंटरफेरोमेट्री की थ्योरी विकसित की थी। इस प्रयोग में मैक्रोस्कोपिसिटी (μ) = 15.5 का मान हासिल किया गया, जो अब तक के सभी समान प्रयोगों से कहीं अधिक है।
तुलना के लिए, इलेक्ट्रॉनों में ऐसा ही परीक्षण करने के लिए उनकी क्वांटम अवस्था को लगभग 100 मिलियन वर्षों तक बनाए रखना पड़ेगा—जबकि यहाँ यह सब एक सेकंड के सौवें हिस्से में संभव हुआ।
भविष्य और संभावित उपयोग
यह प्रयोग यह समझने में मदद करता है कि क्वांटम फिज़िक्स इतनी अजीब क्यों लगती है, जबकि हमारी रोज़मर्रा की दुनिया इतनी सामान्य दिखाई देती है।
भविष्य में और भी बड़े कणों तथा अलग-अलग सामग्रियों पर ऐसे प्रयोग किए जाएंगे। इसके अलावा, यह तकनीक अत्यंत सूक्ष्म बलों को मापने और नैनोटेक्नोलॉजी, सेंसर टेक्नोलॉजी तथा फंडामेंटल फिज़िक्स में नए रास्ते खोल सकती है।
अधिक जानकारी के लिए यूनिवर्सिटी की official website पर विजिट किजिए। Research Paper